Monday, 21 September 2015

कांग्रेस बताए क्यों होगा वर्ग संघर्ष
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संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर कांग्रेस ने वर्ग संघर्ष का तीर छोड़ा है. कांग्रेस प्रमुख सोनिया और राहुल गांधी बताएं कि आखिर वर्ग संघर्ष क्यों होगा. देश में आरक्षण की जरूरत वर्ग में समानता लाने के लिए पिछड़े और अनुसूचित जाति और जनजाति को दी गयी थी. आजादी के बाद इन वर्गों में बहुत सारे बदलाव आए हैं. लोगों में सामाजिक बराबरी और भेदभाव कम हुआ है.

बड़ी और अहम बात यह है कि अब पिछड़े और अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग में भी बहुत सारे लोग आरक्षण का लाभ पाकर सामान्य वर्ग में आ गए हैं. कांग्रेस यह बताएं कि क्या वह आज भी समाज को ब्राह्मण या क्षत्रिय के चश्मे से देखती है . सोनिया गांधी यह बताएं कि जो पिछड़े वर्ग के लोग सामाजिक हैसियत में सामान्य वर्ग के बराबरी में आ गये हैं उन्हें आरक्षण से क्यों फायदा दिया जाय. या देश का वह तबका जो सामान्य वर्ग की तरह जीवनयापन कर रहा है. उसे सामान्य वर्ग का क्यों न माना जाए.


बीते करीब अड़सठ सालों में देश के नजरिए में बहुत सारे बदलाव आएं हैं. लोगों के सोचने का नजरिया बदला है. लोग अब किसी पार्टी विशेष के सदस्य के तौर पर नहीं बल्कि एक प्रबुद्ध नागरिक के तौर पर जीना चाहते हैं. सामान्य वर्ग में भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें दो जून की रोटी नसीब नहीं हो रही है. ऐसे में उन्हें सामान्य वर्ग का कैसे माना जा सकता है. महज सामान्य वर्ग में पैदा होने की सजा उन्हें नहीं दी जा सकती.


आज देश के हालात में बदलाव आया है. देश के लाखों लोगों ने प्रधानमंत्री के  आवाज पर गैस सब्सिडी छोड़ी है. इसमें केवल सामान्य वर्ग के लोग नहीं हैं, इसमें पिछड़े और अनुसूचित जाति / जनजाति के भी लोग हैं. इन सब ने देश हित में छूट को नकारा है. इन हालात में कांग्रेस जवाब दे कि वर्ग संघर्ष का नारा देकर वह लोगों को क्यों बांटना चाहती है.

कोई भी योजना लंबे समय तक बिना किसी फायदे  और नुकसान के आकलन पर नहीं चलायी जा सकती है. करीब एक लंबा समय तय करने के बाद किसी भी योजना में बदलाव की गुजांइश होती है. एक ढर्रे पर पूरा जीवन भी नहीं जिया जा सकता.
कांग्रेस ने भी समाज को पूरा बांटने का काम किया है. आज जब पार्टी की जमीनी राजनीति मरती जा रही है  तो कांग्रेस इस तरह से महज विरोध के तौर पर विरोध का रास्ता अख्तियार कर रही है. जो किसी भी तरह से उचित नहीं दिखाई देता. आज जब देश विकास कर रहा है तो उसे अपने सभी पक्षों पर ध्यान देना होगा. पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति और जनजाति के तमाम दूसरे लोगों तक जहां आरक्षण नहीं मिल पाया है उन्हें देना होगा. इसमें कोरी राजनीति की कोई जरूरत दिखाई नहीं देती.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की नीति पर पुनर्विचार की बात सही है. लंबा समय बीतने के बाद इस तरह के मुद्दों की जांच परख की जानी चाहिए. भागवत का यह कहना भी सही दिखता है कि यह तय होना चाहिए कि कितने लोगों को कितने दिनों तक आरक्षण दिया जाना चाहिए.
संघ के मुखपत्र पांचजन्य और आर्गेनाइज़र के साथ साक्षात्कार में ऐसा कुछ नहीं दिखता जिससे भागवत का विरोध किया जा सके. आरक्षण के सही तो गलत दोनों पहलुओं पर पूरी तरह से सुझाव मांगे जाने चाहिए. इससे इस विषय पर पूरा मंथन हो सकेगा. पिछड़े वर्गों के वे लोग जो अभी भी पिछड़े हैं उन्हें पूरी तरजीह मिल सकेगी. इन तरह के मुद्दों के लिए भागवत का सुझाव भी सही दिखता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर एक समिति का गठन करे.
संघ के मुखपत्र को दिए साक्षात्कार में भागवत का कहना था कि जातिगत आरक्षण का दुरुपयोग हुआ है और राजनीतिक दलों ने इसका फ़ायदा भी उठाया है. यह बातें बिल्कुल सहीं हैं देश की राजनीतिक पार्टियां इन जातियों की ही राजनीति से अपनी रोटियां सेंक रहीं हैं. विकास का मुद्दा पीछे चला गया है. किसी जाति विशेष के लोगों को ज्यादा तरजीह देना किसी भी रूप में संवैधानिक नहीं है.
आज का भारत आधुनिक भारत है. ऐसे में इस तरह की दकियानुसी बातें कर सोनिया गांधी और राहुल का साबित करना चाहते हैं, यह समझ से परे है.
कांग्रेस ने जाति के नाम पर देश के साथ खूब खेल खेला. जिन वर्गों को आरक्षण दिया गया था उसे आजादी के कई दशकों तक लागू ही नहीं किया गया. कांग्रेसी चमचागिरी की सरकार चलाते रहे. आजाद भारत में सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाली यह पार्टी पारिवारवाद की भेंट चढ़ गई. क्या कांग्रेस दूसरे कांग्रेसी सदस्यों को कमान नहीं सौंप सकती ? ऐसे में पार्टी एक गलत नेतृत्व को संभालने में लगी है.
दूसरे दलों को भी आरक्षण के सही लाभार्थियों के बारे में सोचना चाहिए. राजनीति की दिशा सही होनी चाहिए. महज खुद का लाभ और राजनीतिक स्वार्थ देखना अब ज्यादा समय तक नहीं चलने वाला है. ऐसे में भले ही फिलहाल में राजनीतिक पार्टियां तू-तू, मैं-मैं करें, लेकिन असल मुद्दा सही लोगों को आरक्षण का लाभ मिलने का है. आरक्षण से जो फायदा लेकर सामान्य वर्ग में चले गये हैं उन्हें अब आरक्षण की वैशाखी छोड़नी चाहिए.
मामले पर कांग्रेस ने पलटवार भले ही किया है लेकिन कांग्रेस को पता होनी चाहिए कि देश की संस्कृति सहिष्णुता की रही है. वर्ग संघर्ष नहीं होगा. आप विकास की राजनीति करिए सभी वर्ग खुश रहेंगे.

कांग्रेस के सचिव भक्त चरण दास ने कहा कि आज़ादी के इतने सालों के बाद आज भी इतनी जातियां हैं जिनकी आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति बिलकुल हाशिये पर है. कांग्रेस को इस बात का जवाब देना चाहिए कि आईआईटी के वे 76 छात्र पास क्यों नहीं कर पा रहे. कांग्रेस देश को यह बताएं कि इनका क्या कसूर है. इन्हें आरक्षण तो दिया गया था. इन्हें बेहतर करने के लिए लगातार सुविधाएं देनी चाहिए. आरक्षण की जगह किसी भी वर्ग के छात्र को बेहतरीन सुविधाएं उनके रहने, खाने, वजीफे का इंतजाम होना चाहिए.
बिहार के सुशासन बाबू बताएं कि आज भी बिहार से लोगों का पलायन क्यों नहीं रुक रहा है. क्या इसमें भी वह आरक्षण की मांग करते हैं. नीतिश कुमार के लाख विकास के दावों के बात भी बिहार की ट्रेनों में लोगों की संख्या कम नहीं हो रही है. वह किस विकास की बात करते हैं. महज जनता को जाति के जाल में फंसाकर राज्य करने वाली पार्टियों को यह सोचना होगा कि विकास से ही देश का हित होगा. जनता दल (यूनाइटेड) का आरोप है कि क़तार के आख़िरी लोगों को सत्ता से दूर रखने की साज़िश के तहत ही ऐसी बातें कही जा रही हैं, कहीं से भी सही नहीं दिखता.

 संविधान में समाज के पिछड़े लोगों के उत्थान के लिए आरक्षण का रास्ता निकाला गया है. इसके लिए समय-समय पर पिछड़े वर्ग के और अनुसूचित जाति/ जनजाति के लोगों को जो सामान्य वर्ग में पहुंच गये हैं उन्हें दूसरे वंचित लोगों के लिए जगह बनानी होगी.


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